हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ी चुनौती, CM नायब सैनी ने लिया बड़ा फैसला

हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार और बिजली कर्मचारी संगठनों के बीच निजी बिजली वितरण लाइसेंस को लेकर टकराव जारी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों की मांग है कि बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री से सरकारी नौकरियों और उपभोक्ताओं के हितों पर असर पड़ सकता है।

गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण को लेकर विवाद

विवाद की मुख्य वजह हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने का फैसला है। बिजली कर्मचारी संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि निजी कंपनी के आने से रोजगार की सुरक्षा और बिजली सेवाओं की जवाबदेही को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

इसी मुद्दे पर कर्मचारियों ने शुक्रवार को गुरुग्राम के एमजी रोड स्थित बिजली विभाग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने निजी बिजली वितरण व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की।

CM नायब सैनी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 22 अक्टूबर को स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के फैसले को चुनौती देगी। सरकार इस मामले को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) के समक्ष उठाने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बिजली कर्मचारी संगठनों से प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल वापस लेने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं पर बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं।

उपभोक्ताओं और कर्मचारियों पर क्या होगा असर?

बिजली वितरण व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर कर्मचारियों ने नौकरी की सुरक्षा, बिजली दरों और सार्वजनिक सेवाओं की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आशंकाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन संबंधित फैसलों और आगे की कार्रवाई के आधार पर ही किया जा सकेगा।

फिलहाल, सरकार के कानूनी कदम और कर्मचारी संगठनों के विरोध के बीच यह मामला हरियाणा की बिजली व्यवस्था के लिए अहम बना हुआ है।

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