
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 21 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत शानदार तेजी के साथ हुई। सेंसेक्स कुछ ही मिनटों में 800 अंक से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी में करीब 224 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की इस तेजी के बीच निवेशकों की नजर रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों पर भी रही। देश के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू खुलने से पहले बाजार में इन शेयरों की चाल चर्चा में रही।
सेंसेक्स 800 अंक उछला, निफ्टी 23,100 के पार
बुधवार को बाजार खुलते ही खरीदारी का जोर देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 73,852.90 के स्तर के मुकाबले 74,337.93 पर खुला। इसके बाद शुरुआती कारोबार में यह 800 अंक से ज्यादा चढ़कर 74,668 के स्तर तक पहुंच गया।वहीं, एनएसई निफ्टी भी पिछले बंद 22,888.95 के मुकाबले 23,000 के पार खुला और करीब 224 अंक चढ़कर 23,120.90 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
क्या Jio IPO से बाजार को मिला सपोर्ट?
शेयर बाजार में तेजी ऐसे समय आई है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सर्विसेज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के लिए खुल रहा है। करीब ₹30,200 करोड़ से अधिक आकार के इस इश्यू को लेकर बाजार में चर्चा बनी हुई है।आईपीओ से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में भी तेजी देखी गई। हालांकि, बाजार की पूरी तेजी का कारण केवल जियो आईपीओ को मानना सही नहीं होगा। इसके लिए दूसरे घरेलू और वैश्विक कारकों तथा अलग-अलग शेयरों के योगदान को भी देखना जरूरी है।
रिलायंस और जियो फाइनेंशियल के शेयरों में बढ़त
शुरुआती कारोबार के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर करीब 2.30% चढ़कर ₹1,234 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर में 1% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई और यह करीब ₹216.30 पर पहुंच गया।जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी के बीच रिलायंस समूह की कंपनियों के शेयरों पर बाजार की नजर बनी हुई है।
19 अक्टूबर की गिरावट के बाद बाजार में तेजी
इससे पहले 19 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। सेंसेक्स 876 अंक टूटकर 73,853 के आसपास बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 257 अंक गिरकर 22,889 पर आ गया था। 20 अक्टूबर को दशहरे के कारण बाजार बंद रहा।बुधवार की तेजी ने बाजार को पिछली गिरावट से उबरने का मौका दिया। हालांकि, आगे बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, वैश्विक संकेतों और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।



